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Showing posts from November, 2025

कीमोथेरेपी: साइड इफेक्ट्स और बचाव के आसान उपाय

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 कीमोथेरेपी क्या होती है? कीमोथेरेपी एक दवाई है जो खासतौर पर कैंसर जैसी बीमारियों के लिए दी जाती है। यह दवाई कैंसर की खराब कोशिकाओं को मारती है ताकि वह शरीर में फैल न पाएं। कीमोथेरेपी शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी थोड़ी बहुत नुकसान पहुँचा सकती है, इसलिए इसके कुछ साइड इफेक्ट्स होते हैं। यह दवा कई तरीकों से दी जा सकती है जैसे इंजेक्शन, ड्रिप, या गोलियों के रूप में। यह ट्यूमर को छोटा करने, बीमारी को रोकने और मरीज की जीवन रक्षा करने में मदद करती है। कीमोथेरेपी से बाल क्यों झड़ते हैं? कीमोथेरेपी दवा तेज़ी से बढ़ने वाली कोशिकाओं पर असर करती है। बाल की जड़ें भी तेज़ी से बढ़ती हैं इसलिए वे प्रभावित होती हैं और बाल झड़ने लगते हैं। बालों का झड़ना आमतौर पर पूरे सिर पर या शरीर के अन्य हिस्सों में भी हो सकता है। यह झड़ना अस्थायी होता है। इलाज खत्म होने के बाद बाल धीरे-धीरे वापस उग जाते हैं। मरीज और परिवार के लिए मानसिक रूप से यह मुश्किल हो सकता है, इसलिए इसे संभालने के लिए डॉक्टर सलाह देते हैं। कीमोथेरेपी से उल्टी और मिचली क्यों होती है? कीमोथेरे...

बायोमार्कर: पहचान, महत्व और उपयोग की सरल व्याख्या

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  Biomarker क्या होता है? बायोमार्कर शरीर में मौजूद कोई भी मापने योग्य संकेत, पदार्थ, या संकेतक होता है जो किसी बीमारी, शरीर की स्थिति या दवाओं के प्रभाव के बारे में जानकारी देता है। यह खून, मूत्र, लार, टिश्यू या शरीर के स्कैन से पाया जा सकता है। बायोमार्कर डॉक्टरों को बीमारी जल्दी पहचानने में मदद करता है। यह रोग की गंभीरता और इलाज कितना प्रभावी है, इसे भी बताने में उपयोग होता है। आज मेडिकल रिसर्च में बायोमार्कर की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। बायोमार्कर की जरूरत क्यों होती है? कई बार बीमारियाँ शरीर में छिपकर विकसित होती हैं जिनके शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में बायोमार्कर बीमारी को शुरुआती स्टेज में पकड़ने में मदद करता है। यह डॉक्टर को सही समय पर सही इलाज शुरू करने में सक्षम बनाता है। यह इलाज का परिणाम कैसा मिल रहा है, इसकी निगरानी भी करता है। बायोमार्कर से मरीज की भविष्य की स्वास्थ्य स्थिति का अनुमान भी लगाया जा सकता है बायोमार्कर कैसे काम करता है? जब कोई बीमारी शरीर में बनती है, तो कुछ विशेष रसायन, प्रोटीन या जीन बदल ...

शराब और कैंसर: एक जानलेवा सच जिसे हर इंसान को जानना चाहिए

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 क्या शराब पीने से कैंसर हो सकता है? हाँ शराब पीने से कैंसर हो सकता है क्योंकि शराब शरीर के अंदर पहुँचते ही टूटकर एक बहुत जहरीला पदार्थ बनाती है जो हमारी कोशिकाओं के अंदर घुसकर उन्हें खराब कर देता है और कोशिकाएँ/ जब एक बार खराब हो जाती हैं तो वे अपने सामान्य तरीके से काम करना छोड़ देती हैं और अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं और यही अनियंत्रित बढ़ने वाली कोशिकाएँ एक जगह इकठ्ठा होकर गांठ बना लेती हैं जिसे ही कैंसर कहा जाता है शराब शरीर की कोशिकाओं को कैसे नुकसान पहुँचाती है? शराब शरीर में जाते ही लीवर उसे तोड़ता है और इस प्रक्रिया में acetaldehyde नाम का एक बहुत ही जहरीला रसायन बनता है यह रसायन कोशिकाओं के DNA को सीधा नुकसान पहुँचाता है DNA हमारी कोशिका का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जो यह बताता है कि कोशिका कैसे बनेगी कैसे काम करेगी और कब रुकेगी लेकिन जब शराब DNA को तोड़ देती है तो कोशिका की जानकारी गड़बड़ा जाती है और कोशिका पागल की तरह बिना रुके बढ़ने लगती है जो फिर कैंसर का रूप ले लेती है शराब इसके साथ साथ शरीर में free radicals ...

Cervical Cancer: महिलाओं में मौन लेकिन ख़तरनाक बीमारी/

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 Cervical Cancer क्या होता है? Cervical Cancer एक प्रकार का कैंसर है जो महिलाओं के गर्भाशय ग्रीवा (cervix) में होता है। यह वह हिस्सा होता है जो गर्भाशय (uterus) को योनि (vagina) से जोड़ता है। यह कैंसर आमतौर पर धीरे-धीरे विकसित होता है। इसका मुख्य कारण HPV (Human Papillomavirus) संक्रमण होता है। शुरुआती चरणों में इसके लक्षण बहुत हल्के या नज़रअंदाज़ करने लायक होते हैं। Cervical Cancer के शुरुआती लक्षण क्या हैं? असामान्य योनि से खून आना, खासकर पीरियड्स के बीच या संभोग के बाद। पीरियड्स का अत्यधिक या लंबे समय तक चलना। सफेद या बदबूदार योनि स्राव (vaginal discharge)। पेट के निचले हिस्से या कमर में दर्द। बार-बार पेशाब लगना या पेशाब में जलन। क्या Cervical Cancer का दर्द महसूस होता है? शुरुआती अवस्था में आमतौर पर दर्द नहीं होता। जैसे-जैसे कैंसर बढ़ता है, पेट के निचले हिस्से में या श्रोणि (pelvic) क्षेत्र में दर्द हो सकता है। संभोग के दौरान दर्द या असहजता महसूस हो सकती है। कमर और पैरों में दर्द भी कभी-कभी होता है। दर्द क...

किडनी कैंसर के लक्षण: शुरुआती संकेत, कारण और पूरी जानकारी /

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 किडनी कैंसर के लक्षण क्या हैं? किडनी कैंसर (Kidney Cancer) के शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। लेकिन जब यह बढ़ने लगता है, तब कुछ खास संकेत दिखाई देने लगते हैं। सबसे आम लक्षणों में मूत्र में खून आना (hematuria) शामिल है, जिससे पेशाब का रंग लाल या भूरे रंग का हो सकता है। इसके अलावा कमर या पीठ के एक तरफ लगातार दर्द महसूस हो सकता है। मरीज को शरीर में कमजोरी, थकान, भूख कम लगना, वजन घटना और कभी-कभी बुखार रहना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। कुछ लोगों में पेट के पास गांठ या सूजन भी महसूस हो सकती है। क्या किडनी कैंसर के शुरुआती लक्षण पहचानना आसान होता है? नहीं, शुरुआती चरण में किडनी कैंसर के लक्षण बहुत हल्के या कभी-कभी बिल्कुल नहीं होते। इसी वजह से यह अक्सर देर से पकड़ा जाता है। कई बार डॉक्टर इसे किसी और बीमारी की जांच के दौरान अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन में गलती से खोज लेते हैं। इसलिए अगर किसी को बार-बार थकान, भूख कम लगना या पेशाब में खून जैसी समस्या हो, तो उसे तुरंत जांच करवानी चाहिए ताकि बीमारी को समय रहते पकड़ा जा सके। क्या किडनी ...