ल्यूकेमिया के प्रकार और उनके लक्षण:

 1. ल्यूकेमिया क्या है?



  • ल्यूकेमिया खून का कैंसर है जिसमें हड्डियों के गूदे (Bone Marrow) में असामान्य सफेद रक्त कोशिकाएँ बनती हैं।
  • ये कोशिकाएँ सामान्य कोशिकाओं की जगह ले लेती हैं और खून में लाल रक्त कोशिकाओं व प्लेटलेट्स की संख्या घटा देती हैं।
  • इसकी वजह से संक्रमण जल्दी होता है, खून बहना रुकता नहीं और शरीर बहुत कमजोर हो जाता है।
  • यह बीमारी बच्चों से लेकर बड़ों तक किसी में भी हो सकती है।
  • ल्यूकेमिया का सही समय पर इलाज जरूरी है वरना यह तेजी से फैल सकता है।

2. ल्यूकेमिया के मुख्य 4 प्रकार कौन-कौन से हैं?

ल्यूकेमिया को बीमारी की गति और प्रभावित कोशिका के आधार पर 4 मुख्य प्रकार में बांटा जाता है:

  1. तीव्र लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (ALL) – लिम्फोसाइट कोशिकाओं में तेजी से फैलता है।
  2. तीव्र माइलॉयड ल्यूकेमिया (AML) – माइलॉयड कोशिकाओं में तेजी से फैलता है।
  3. दीर्घकालिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) – लिम्फोसाइट कोशिकाओं में धीरे-धीरे बढ़ता है।
  4. दीर्घकालिक माइलॉयड ल्यूकेमिया (CML) – माइलॉयड कोशिकाओं में धीरे-धीरे बढ़ता है।

3. तीव्र (Acute) और दीर्घकालिक (Chronic) ल्यूकेमिया में क्या अंतर है?

  • तीव्र ल्यूकेमिया में कोशिकाएँ अधूरी और असामान्य होती हैं जो जल्दी-जल्दी बढ़ती हैं,
  • इसलिए लक्षण भी जल्दी दिखते हैं।
  • दीर्घकालिक ल्यूकेमिया में कोशिकाएँ कुछ हद तक पकी हुई होती हैं और धीरे-धीरे बढ़ती हैं, इसलिए शुरुआती समय में लक्षण नहीं दिखते।

4. तीव्र लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (ALL) में कौन सी कोशिकाएँ प्रभावित होती हैं?

  • इसमें लिम्फोसाइट नाम की सफेद रक्त कोशिकाएँ प्रभावित होती हैं।
  • ये शरीर को संक्रमण से बचाने का काम करती हैं
  • लेकिन ALL में इनकी संख्या बहुत बढ़ जाती है और ये सही से काम नहीं करतीं।
  • यह बच्चों में ज्यादा होता है लेकिन वयस्कों में भी हो सकता है। मुख्य लक्षण हैं – बुखार, थकान, हड्डी में दर्द, मसूड़ों से खून आना।

5. तीव्र माइलॉयड ल्यूकेमिया (AML) के दो प्रमुख लक्षण

   इसमें माइलॉयड कोशिकाएँ प्रभावित होती हैं जिससे लाल रक्त कोशिकाएँ और प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं। दो प्रमुख लक्षण हैं:

  1. शरीर पर लाल या बैंगनी धब्बे आना।
  2. सांस लेने में तकलीफ।
    इसके अलावा कमजोरी, बार-बार बुखार, खून बहना भी हो सकता है।

6. दीर्घकालिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) किस उम्र में ज्यादा होता है?

  • यह ज्यादातर 50 साल से ऊपर के लोगों में पाया जाता है। 
  • धीरे-धीरे बढ़ने वाला रोग है और कई बार रूटीन चेकअप में ही पता चलता है। 
  • लक्षण हैं – गर्दन या बगल में गांठ, वजन घटना, रात में पसीना आना, बार-बार संक्रमण होना।

7. दीर्घकालिक माइलॉयड ल्यूकेमिया (CML) का मुख्य कारण

  • इसका मुख्य कारण फिलाडेल्फिया क्रोमोसोम नाम का बदलाव है।
  • इसमें दो क्रोमोसोम के टुकड़े बदलकर नया असामान्य जीन बना देते हैं
  • जिससे माइलॉयड कोशिकाएँ जरूरत से ज्यादा बनने लगती हैं।
  • यह वयस्कों में ज्यादा देखा जाता है और धीरे-धीरे बढ़ता है।

8. हेरी सेल ल्यूकेमिया (HCL) में कोशिकाओं की खास पहचान

  • इसमें लिम्फोसाइट कोशिकाओं पर बाल जैसे पतले उभार होते हैं जो माइक्रोस्कोप में दिखते हैं।
  • यह बीमारी दुर्लभ है और ज्यादातर मध्यम उम्र के पुरुषों में पाई जाती है। लक्षण – थकान, बार-बार संक्रमण, प्लीहा का बढ़ना।

9. मिक्स्ड फेनोटाइप एक्यूट ल्यूकेमिया (MPAL) में कौन सी कोशिकाएँ खराब होती हैं?

  • इसमें लिम्फोसाइट और माइलॉयड दोनों तरह की कोशिकाएँ खराब होती हैं।
  • यह मिश्रित प्रकार का ल्यूकेमिया है जिसका इलाज सामान्य ल्यूकेमिया से ज्यादा जटिल होता है।
  • मरीज में तेज बुखार, खून की कमी और तेजी से वजन घटना जैसे लक्षण होते हैं।

10. जुवेनाइल माइलोमोनोसाइटिक ल्यूकेमिया (JMML) किस उम्र में होता है?

  • यह 4 साल से छोटे बच्चों में पाया जाने वाला दुर्लभ ल्यूकेमिया है।
  • इसमें माइलॉयड और मोनोसाइट कोशिकाएँ बहुत बढ़ जाती हैं और प्लीहा व लिवर में इकट्ठा हो जाती हैं।
  • लक्षण – प्लीहा का बढ़ना, बुखार, त्वचा पर दाने, खून की कमी।

11. ल्यूकेमिया होने के मुख्य कारण क्या हैं?

  • ल्यूकेमिया के कारण पूरी तरह समझे नहीं गए हैं,
  • लेकिन कुछ फैक्टर्स जैसे रेडिएशन, केमिकल्स (जैसे बेंजीन), जेनेटिक बदलाव, और कुछ वायरस इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
  • परिवार में अगर किसी को ल्यूकेमिया हो तो खतरा थोड़ा बढ़ जाता है।

12. ल्यूकेमिया का निदान कैसे किया जाता है?

  • ब्लड टेस्ट और बोन मैरो बायोप्सी से पता चलता है कि खून में असामान्य कोशिकाएँ हैं या नहीं। 
  • डॉक्टर ब्लड सेल्स की संख्या और उनकी प्रकृति देखकर बीमारी का पता लगाते हैं।

13. ल्यूकेमिया का इलाज क्या-क्या होता है?

  • कीमोथेरेपी (दवाइयों से इलाज) सबसे आम तरीका है। 
  • रेडिएशन थेरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट भी कुछ मामलों में जरूरी होते हैं। 
  • नए जमाने की दवाएं (Targeted Therapy) भी इस्तेमाल होती हैं।

14. ल्यूकेमिया के मरीजों को किन सावधानियों का पालन करना चाहिए?

  • साफ-सफाई का खास ध्यान रखें और संक्रमण से बचें। 
  • डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें। पोषणयुक्त भोजन करें और आराम करें।

15. क्या ल्यूकेमिया पूरी तरह ठीक हो सकता है?

  • हाँ, अगर समय पर इलाज शुरू किया जाए तो बहुत से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।
  • बच्चों में उपचार का रिस्पांस बेहतर होता है। हालांकि कुछ प्रकार गंभीर होते हैं और लंबा इलाज चाहिए।

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