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Showing posts from July, 2025

पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण, कारण, इलाज और बचाव

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  पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर क्या होता है? जब भी ब्रेस्ट कैंसर की बात होती है, तो ज़्यादातर लोग इसे केवल महिलाओं की बीमारी मानते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि ब्रेस्ट कैंसर पुरुषों में भी हो सकता है, हालांकि यह महिलाओं की तुलना में बहुत ही दुर्लभ होता है। पुरुषों में इसके मामलों की संख्या भले ही कम हो, लेकिन इसकी गंभीरता कम नहीं होती। समस्या तब और बढ़ जाती है जब इसे गंभीरता से नहीं लिया जाता और लक्षणों को नजरअंदाज़ कर दिया जाता है। पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर को लेकर जागरूकता की भारी कमी है, और यही कारण है कि इसके लक्षणों को समझने में देर होती है, जिससे कैंसर फैलने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि यह बीमारी कैसे होती है, इसके लक्षण क्या होते हैं, किन लोगों को इसका खतरा अधिक होता है, और इसका इलाज क्या है। क्या होता है पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर? पुरुषों में भी स्तन ऊतक (breast tissue) होता है, हालांकि वह महिलाओं की तुलना में बहुत कम मात्रा में होता है। यह ऊतक जन्म से ही होता है, लेकिन प्यूबर्टी के बाद पुरुषों में हार्मोनल बदलाव के क...

धूम्रपान से फेफड़ों का कैंसर क्यों होता है? कारण, लक्षण और बचाव

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  धूम्रपान से फेफड़ों का कैंसर क्यों होता है? धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर का सबसे मुख्य कारण है। सिगरेट, बीड़ी, हुक्का, सिगार आदि में पाए जाने वाले रसायन फेफड़ों की कोशिकाओं को धीरे-धीरे नुक़सान पहुँचाते हैं और कैंसर को जन्म देते हैं। यह एक धीमी लेकिन घातक प्रक्रिया है जिसमें वर्षों लग सकते हैं, परंतु इसका असर बहुत गंभीर होता है। धूम्रपान करते समय व्यक्ति केवल तम्बाकू ही नहीं, बल्कि 7000 से अधिक रसायनों का मिश्रण अपने शरीर में लेता है। इनमें से 70 से अधिक रसायन सीधे कैंसर पैदा करने वाले (carcinogens) होते हैं। जब ये रसायन फेफड़ों की कोशिकाओं के संपर्क में आते हैं तो वे कोशिकाओं को प्रभावित करते हैं, जिससे DNA को नुक़सान पहुँचता है और कोशिकाएँ असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, जो कि कैंसर का कारण बनती हैं। धूम्रपान से फेफड़ों का कैंसर कैसे शुरू होता है? जब कोई व्यक्ति सिगरेट का धुआं खींचता है, तो वह न केवल तम्बाकू, बल्कि कार्बन मोनोऑक्साइड, फॉर्मल्डिहाइड, बेन्जीन, टार, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, अमोनिया जैसे हानिकारक रसायनों को भी अपने फेफड़ों में खींचता है। ये ...

फेफड़ों के कैंसर पर काबू: इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी से बेहतर इलाज:

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इम्यूनोथेरेपी क्या है और यह कैसे काम करती है? इम्यूनोथेरेपी एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जो शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को सक्रिय करके कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में मदद करती है। सामान्यतः कैंसर कोशिकाएं खुद को इम्यून सिस्टम से छुपा लेती हैं, जिससे शरीर उन्हें नष्ट नहीं कर पाता। इम्यूनोथेरेपी दवाएं जैसे पेम्ब्रोलिज़ुमैब (Pembrolizumab), निवोलुमैब (Nivolumab) आदि इन ‘ब्रेक’ को हटाकर शरीर की इम्यून कोशिकाओं को कैंसर के खिलाफ लड़ने में सक्षम बनाती हैं। यह विशेष रूप से उन मरीजों में उपयोगी है जिनके कैंसर में PD-L1 प्रोटीन अधिक मात्रा में होता है। टार्गेटेड थेरेपी क्या है और यह कैसे काम करती है? टार्गेटेड थेरेपी कैंसर उपचार की एक आधुनिक तकनीक है जो सीधे कैंसर कोशिकाओं की विशेष आनुवंशिक गड़बड़ियों (म्यूटेशन) को निशाना बनाकर काम करती है। इससे स्वस्थ कोशिकाएं कम प्रभावित होती हैं। फेफड़ों के कैंसर में EGFR, ALK, ROS1, BRAF जैसे म्यूटेशन अक्सर देखे जाते हैं। इनके लिए अलग-अलग दवाएं बनाई गई हैं जैसे: EGFR म्यूटेशन के लिए: एरलोटिनिब (Erlotinib), गेफिटिनिब (Gefit...

कोलोनोस्कोपी स्क्रीनिंग: अपनी बड़ी आंत की जाँच क्यों है ज़रूरी?

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को लोनोस्कोपी स्क्रीनिंग क्या है? कोलोनोस्कोपी स्क्रीनिंग एक चिकित्सा प्रक्रिया है जिसका उपयोग बड़ी आंत (कोलन और मलाशय) के अंदरूनी हिस्से की जांच करने के लिए किया जाता है। यह मुख्य रूप से कोलोरेक्टल कैंसर (पेट का कैंसर) और अन्य आंतों की समस्याओं जैसे पॉलीप्स (छोटी वृद्धि), सूजन, रक्तस्राव और अल्सर का पता लगाने और रोकने के लिए की जाती है। यह कैसे काम करती है? इस प्रक्रिया में, एक एंडोस्कोप (एक लंबी, पतली और लचीली ट्यूब जिसके सिरे पर एक छोटा कैमरा और प्रकाश होता है) को गुदा के माध्यम से धीरे-धीरे बड़ी आंत में डाला जाता है। कैमरा डॉक्टर को कंप्यूटर स्क्रीन पर आंत की अंदरूनी दीवार की विस्तृत तस्वीरें देखने की अनुमति देता है। यदि कोई असामान्य वृद्धि, जैसे पॉलीप्स, दिखाई देती है, तो डॉक्टर उन्हें हटा सकते हैं या बायोप्सी (जांच के लिए ऊतक का एक छोटा नमूना लेना) ले सकते हैं। कोलोनोस्कोपी स्क्रीनिंग क्यों महत्वपूर्ण है? कैंसर की रोकथाम: कोलोनोस्कोपी का सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह कोलोरेक्टल कैंसर को शुरुआती चरण में ही पकड़ सकता है, जब इसका इलाज सबसे प्रभावी होता है। अधिकां...